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5-10 साल बाद कितने हो जाएंगे चीता । भारत में कितनी हो जाएगी चीतों की संख्या , चीतों के गले में क्यों लगाए गए रेडियो कॉलर ।

                          भारत में फिर से देखने को मिलेंगा चीता 

जैसा की आप जानते ही है कि चीता परिस्थति तंत्र का एक मुख्य घटक है और भारत में पिछले 70-75 सालों से  चीते विलुप्त हो गए थे   जो की परिस्थिति तंत्र के लिए एक बुरा संकेत है पिछले 70-75 सालों से हमारे देश में चीते विलुप्त हो गए थे और इसके बाद अब फिर से हमारे देश में चीते दिखाई देंगे जिसके लिए भारत सरकार कोशिश कर रही है यह आठ चीते नामीबिया जोकि दक्षिण अफ्रीकी देश है से लाए गए हैं लांबिया के जीव वैज्ञानिक लंबे समय से भारत में रह कर के भारत की परिस्थिति तंत्र की स्थिति पर शोध कर रहे थे और वातावरण को देख रहे थे जिनको अब कूनो नेशनल पार्क मध्य प्रदेश में छोड़ा गया है  कुल 8 सीटों को भारतीय वायुसेना की मदद से भारत लाया गया है जिसमें 5 मादा चीता है और 3 नर चीता है उक्त अभियान को प्रोजेक्ट चीता नाम दिया गया है 




यह सभी चीजें अभी जंगलों में नहीं जाएंगे जो कि अभी खास देखरेख में एक माह तक रखे जाएंगे। 

परिस्थिति तंत्र को बनाए रखने के लिए परिस्थिति तंत्र  के सभी घटको का होना अत्यन्त आवश्यक होता है अन्यथा ये तंत्र बिगड़ जाता है जिसमे हर उपभोगता किसी दूसरे उपभोगता के ऊपर निर्भर रहता है और सबसे ऊपर की श्रेणी में मांसाहारी जानवर आते है जैसा बाघ, शेर और  चीता ,  जिसमे हमारे देश में बाघ और शेर को विशेष संरक्षण प्राप्त है जिसके बाद भी इनकी संख्या में प्रतिदिन कमी आती जा रही  है अनेको वन्य जीव स्थल और टाइगर रिजर्व होने  के बाद भी देश में चीता अब नही बचे है . 



चीता और शेर के कम होने के अनेको कारण है जैसा इनका बड़ी संख्या में शिकार  किया जाना और जगलो का सही प्रकार से संरक्षण ना किया जाना और अनुकूल वातावरण ना मिलना  | जिसके कारन से इनका संरक्षण किया जाना आवश्यक हो गया था और अनेको अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के प्रोग्राम भी चल रहे है जैसा  29 जुलाई को प्रतिवर्ष अंतर्रस्तीय टाइगर दिवस मनाया जाता है जो की टाइगर संरक्षण की जागरूकता हेतु प्रतिवर्ष मनाया जाता है ा 

हमारे देश भारत भी इस कड़ी में पीछे नही है सन अप्रैल 1973 में भारत सरकार ने प्रोजेक्ट टाइगर जो की एक टाइगर संरक्षण प्रोग्राम है को लॉन्च किया था जिसके बाद से ही भारत सरकार भी उच्च श्रेणी के जानवरो को लगातार संरक्षण प्रदान करने के कदम उठती आ रही है 

जिसमे अब सितम्बर 2022 सरकार ने 8 चीतों को देश के अलग अलग नेशनल पार्को में बसाने की और कदम उठाया है   




कैसे की जाएगी चीजों की देखरेख चीतों के गले में क्यों लगाए गए रेडियो कॉलर ।


उक्त सभी चीजों की देख रे खास रुप से की जा रही है जिसमें सभी चीजों की गर्दन पर जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है ताकि इनकी मॉनिटरिंग की जा सके और कूनो नेशनल पार्क में ही डाटा डाउनलोड फैसिलिटी भी बनाई गई है जिसके माध्यम से इन सभी चीजों का पूरा डाटा रखा जाएगा।




5-10 साल बाद कितने हो जाएंगे चीता । भारत में कितनी हो जाएगी चीतों की संख्या 

प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है की अगर सारी परिस्थितिया अनुकूल रही तो आने वाले 5 से 10 सालों में लगभग चीतों की संख्या 40- 50 से अधिक हो जाएगी जिनको अलग-अलग वन्य जीव संरक्षण संस्थानो में बसाया जाएगा जो की भारत सरकार का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कदम है जो कि भारत के जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वरदान साबित हो सकता है चीता एक खुले मैदान में रहने वाला जानवर है जो कि पूर्ण रूप से मांसाहार पर निर्भर करता है अर्ध शुष्क वातावरण और थोड़ा सा ज्यादा तापमान चीता के लिए सही होता है 



  भारत में जो खुले जंगल है उनको बचाने के काम को भी तेजी मिलेगी जिसमें चीजों के अनुकूल वातावरण को स्थापित किया जाएगा ताकि खुले मैदानों वाले जंगल में  पारिस्थितिकी तंत्र को सुचारू रूप से चलाया जा सके । चीते समानता मनुष्यों के लिए खतरा नहीं होते ही जल्दी मनुष्य के ऊपर आक्रमण नहीं करते और जो बड़े पशु है यह जल्दी से उनके भी ऊपर आक्रमण नहीं करते है wildlife trust of india  ने इसकी शुरुवात की थी ।

Article Written by Mr. Ritik Upadhyay Sir. 

 

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